वेनजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध से गहराया राजनीतिक संकट, भारत पर भी होगा असर

वेनजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध से गहराया राजनीतिक संकट, भारत पर भी होगा असर

वेनजुएला में बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादक और आर्थिक रूप से कमजोर होते इस देश के लिए यह प्रतिबंध है व्यापक नकारात्मक असर डाल सकता हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से वेनेजुएला में राष्ट्रपति चुनाव में धांधली की आशंका के चलते विपक्ष दोवारा चुनाव कराने पर अड़ा हुआ है परंतु राष्ट्रपति मादुरे ऐसा करना नहीं चाहते और बातचीत से मामले को हल करने की बात कहते हैं।

इस पूरे मामले में बड़े देशों की राय बटी हुई है जहां अमेरिका कनाडा जैसे देश वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरे के विरोध में है और विपक्षी नेता गुआदे का समर्थन करते हैं वहीं चीन रूस जैसे देश इस दिशा में एक मत है कि मादुरे ही वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति हैं।हालांकि मादुरे ने अमेरिका जैसे देशों से अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने की बात कही है परंतु फिर भी अमेरिका द्वारा अनसुना किए जाने पर मादुरे ने अपने राजनयिक वापस बुला लिए और इसके बाद अमेरिका ने गत दिनों वेनजुएला पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं।

क्योंकि वेनजुएला इस समय भयानक आर्थिक संकट से जूझ रहा है ऐसे में यह प्रतिबंध उसके लिए घातक होंगे।

यदि भारत के नजरिए से देखें तो अब तक इस विवाद में हमारी सधी हुई प्रतिक्रिया रही है। यदि यह विवाद शीघ्र नहीं निपटता है तो भविष्य में भारत को इसके दुष्प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।

हमारी अर्थव्यवस्था तेल आधारित अर्थव्यवस्था है और वेनजुएला चौथा बड़ा देश है जिससे भारत तेल आयात करता है यदि भारत की तेल आपूर्ति कमजोर होती है या वेनजुएला प्रतिबंध से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ती है तो भारत में महंगाई दर तेजी से बढ़ने की पूरी आशंका रहेगी। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए में भारी गिरावट आ सकती है और व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है।

हालांकि एक दूसरा पक्ष यह है कि यदि वेनजुएला पर अमेरिका प्रतिबंध लगाता है तो वह अपना तेल सस्ते दामों में बेचने को मजबूर होगा। जिससे भारत को फायदा हो सकता है क्योंकि इस बात की तो आशंका कम ही है कि भारत को अमेरिका वेनजुएला से तेल आयात करने से छूट नही देगा। ध्यातव्य हो कि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने के लिए भारत अमेरिका का सहयोगी है और भारत अमेरिका के लिए एशिया में शक्ति संतुलन का एक आवश्यक तत्व भी है। इसलिए अमेरिका भारत को प्रतिबंधों से मुक्ति देगा इसकी पूरी संभावना रहेगी।

इन सबके इतर गौर से देखें तो वेनजुएला की आंतरिक कलह में अमेरिका जैसे देशों का मध्यस्थता ना करके पक्षपातपूर्ण रहना ठीक नहीं है और वर्तमान समय में वैश्विक शांति के विरुद्ध है। अफगानिस्तान सीरिया जैसे देशों का उदाहरण हम देख चुके हैं जो वैश्विक शक्तियों का कुरुक्षेत्र बने हुए हैं ऐसे में वेनजुएला के पड़ोसी देशों और विश्व की बड़ी शक्तियों को मिलकर इस विवाद का हल बातचीत से निकालना चाहिए।

पिछले कुछ समय से यह देखा गया है कि तमाम देशों की कलह का कारण निष्पक्ष चुनाव का अभाव होता है इसलिए यह जरूरी हो गया है कि सभी देश मिलकर संयुक्त राष्ट्र संस्था की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय चुनाव संगठन का गठन करें ताकि किसी देश में हुए चुनाव की निष्पक्षता की निगरानी हो सके और विवाद की स्थिति में अंतिम विकल्प के रूप में इस संगठन द्वारा चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई जा सके।

यदि भविष्य में यह संभव होता है तो यह वैश्विक शांति की दिशा में बहुत बड़ा कदम साबित होगा। इसलिए इस विषय पर सभी देशों को मिलकर गहनता से विचार करना चाहिए।

सुमित यादव

रावगंज, कालपी

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