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न्यूज एंकर बदन से नहीं पर ज़मीर से नंगे होते जा रहे : प्रीति चौबे

न्यूज एंकर बदन से नहीं पर ज़मीर से नंगे होते जा रहे : प्रीति चौबे

देश के ज्यादातर चैनल न्यूज चैनल नहीं न्यूड चैनल बन गए है, भौ‍कने के अंदाज मे एंकररिंग करते है कुछ टीवी पत्रकार बदन से नहीं पर ज़मीर से नंगे होते जा रहे हैं, जूते मे पॉलिस अगर हाथ से किया जाए तो वो काम कहलाता है और अगर जीभ से की जाए तो चाटुकारिता कहलाता है ऐसी ही चाटुकारिता न्यूज चैनल पर साफ दिखाई देती है किसी भी वक़्त टीवी खोलो या तो मोदी जी या तो योगी जी ही दिखाई देते है इन दोनों नेताओ की प्रात:काल शौचालय से लेकर रात्रि सोने तक की 1 एक मिनट का वयौरा रखना यही काम रह गया है, योगी जी ने कितने कुत्ते, बिल्ली, गाय, से गोबर तक की बातें पता चलती है न्यूज संवाददाता इस बात को गंभीरता से बताते है हमे भी पता चलता है कि योगी जी ने गाय गोवर से लेकर और क्या क्या पाले है मै ये नहीं कहती बेशक आप 24 घंटे मोदी जी का दिखाओ उनका भाषण उनकी महिमामण्डल कीजिए लेकिन टीवी के स्क्रीन पर विग्यापन में लिखा कीजिए ताकि देश को पता चल सके कि ये एक व्यवसाय है पत्रकारिता नहीं है,

नोट बन्दी के बाद ना तो आतंकवाद ख़तम हुआ न नक्सलवाद न काला धन वापस आया न नकली नोट छापना बंद हुआ न इकोनॉमिक कैशलेश हुई, लेकिन फिर भी नोट बन्दी की सफलता का डमरू दोनों हाथों से बजाते रहे पूजा भट्ट अगर पाकिस्तान अपनी सहेली का जन्‍म दिन मनाने चली जाती है तो मीडिया आसमान सर पर उठा लेती है लेकिन यही अगर देश का प्रधानमंत्री देश को गुमराह करके नवाज शरीफ के यहां जाकर बिरयानी खाते हैं तो कोई नहीं सवाल करता, पाकिस्तान को उसकी भाषा मे जबाब देना चाहिए उसी की भाषा मे चुनाव के दौरान बार बार दोहराने वाले टीवी चैनल आज मोदी जी से नहीं पूछते कि ये भाषा सीखते सीखते कितने जवानों का शहीद होना बाकी है, दुख की बात ये है कि मोदी जी का पतअंजलि का रिविन काटना देश के सरहद पर जवान का सर काटने से बड़ी खबर हो जाती है, मोदी जी की गिरती हुई साख को बचाने के लिए कुछ टीवी चैनलों ने स्टूडियो मे बैठे बैठे पाकिस्तान के 2 बंकर और 7 सैनिकों को मार गिराने की झूठी खबर फैला दी, वही पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर लाल बत्ती हटाते हैं तो मीडिया को ख़बर नहीं होती, लेकिन यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मोदी जी कर देते हैं तो VVIP कल्चर पर मोदी जी का बड़ा वार हो जाता है, अगर 24 घंटे मोदी जी अपने पैरो मे जहर लगा ले तो 90% पत्रकारो की जिंदगी जोखिम मे पड़ जाएगी ए बात व्यंग मे कह जरूर रही हू पर उसके भीतर के दर्द को गंभीरता को समझने की जरूरत है 2014 मे मोदी जी के एक भी वायदे पूरे नहीं हुए, लेकिन इस पर कोई चैनल पत्रकार नहीं पूछ रहे की काला धन वापस किऊ नहीं आया, महंगाई क्यो नही घटी, पाकिस्तान अपनी मनमाँनियो से क्यो नही बाज़ आ रहा चीन क्यो बार बार आँखे दिखा रहा है, कश्मीर क्यो सुलग रहा है धारा 370 क्यो नही हटाई जा रही है कश्मीरी पंडितो का पुनर्वासन का क्या हुआ, बुलट ट्रेन स्मार्ट सिटी के ख्वाबों का क्या हुआ रुपया किऊ गिर रहा है, लिस्ट बड़ी लंबी है लेकिन सबसे बड़ा सवाल की मोदी जी से फिर भी कोई सवाल नहीं पूछे जा रहे ताल ठोक कर सरकार के साथ ताल से ताल ठोक रहे हैं हम तो बस पूछेंगे लेकिन बस मोदी जी से नहीं पूछेंगे ये भी विपक्षीयो से पूछेंगे मोदी जी जैसे दबाव मे आते हैं देश के किसी भी कोने मे मोदी जी के खिलाफ़ कोई भी व्यक्ति खड़ा हो जाता है मीडिया चैनल उसके व्यक्तिगत जीवन सार्वजनिक जीवन को नोचने के लिए खड़े हो जाते है ये मीडिया का दोहरा चरित्र सामने आता है लोकतन्त्र के 4 स्तंभ को दीमक की तरह चिपके चेहरों को पहचानने की जरूरत है और उन साहसी और प्रमाणिक पत्रकारों का समर्थन करने की जरूरत है जिनके कारण लोकतन्त्र बचा हुआ है...


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