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  • एक कहानी : ट्रेन

    मुझे याद है अभी कुछ साल पहले तक ही घर से कहीं भी बाहर निकलना एक त्यौहार हुआ करता था..अपनी मानसिक और आर्थिक पोज़िशन बलिया स्टेशन से दोनों दिशाओं में जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों के साथ ही कम्फर्टेबल हो पाती थी..मेरे लिए ट्रेन का मतलब ही वही जिसमें कि सीट मिल जाए..और थोड़ी देर चलने के बाद घर से छनवाई हुई...

  • काशी के कण-कण में शिव, शूलटंकेश्वर महादेव:- प्रेम शंकर मिश्र

    वाराणसी: कहते हैं काशी के कण-कण में शिव है और यहां की महिमा भी अनंत है काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है और यहां गलियों से सड़क तक कई ऐसे मंदिर हैं जिनकी पौराणिकता और महत्त्व पुराणों में मौजूद है।यह काशी के पुरातन मंदिरॊ मॆ सॆ एक है। इस मंदिर का उल्लॆख ' काशी खंड' मॆ भी मिलता है यह मंदिर...

  • प्रेम में डूबी लड़की को सामने सिर्फ सपनों का रंगभरा आकाश दिखता है ....

    बात..बारह तेरह वर्ष पहले की है. मैं अपने एक रिश्तेदार के घर पर बैठा हुआ था. रिश्तेदार के घर के सदस्यों के बीच एक उनकी परिचित लड़की भी आयी थी. लड़की ग्यारहवीं में पढ़ने वाली, प्रखर एवं तेजतर्रार थी.उसी वक्त शाहिद कपूर की सुपरहिट फिल्म 'विवाह' थियेटरों में धूम मचाई थी.संयोग से एक दिन पहले वो बच्ची...

  • भागी हुई लड़कियों का बाप!

    वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, वह डरता है कि...

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