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  • मुफ़्तख़ोरी की पराकाष्ठा!

    मुफ़्त दवा, मुफ़्त जाँच, लगभग मुफ़्त राशन, मुफ़्त शिक्षा, मुफ्त विवाह, मुफ्त जमीन के पट्टे, मुफ्त मकान बनाने के पैसे, बच्चा पैदा करने पर पैसे, बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी) करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ़्त, मुफ्त जैसी बिजली 200 रुपए महीना, मुफ्त तीर्थ यात्रा, मरने पर भी पैसे, जन्म से लेकर...

  • जनमंच : विरोध के स्वर तेज,'राज' के कान बजने लगे!!

    अजमेर। अगस्त का क्रांति माह अपने उफान पर है। महात्मा गाँधी के इसी आजाद भारत ने न जाने कितने संघर्ष देखे और झेले हैं। बावजूद, राजनीति की कुत्सित आत्माओं के, देश को लूटने खसोटने और आपस में किसी भी आधार को लेकर जनता को बाँट देने के बावजूद यहां 'लोकतन्त्र' टस से मस नहीं हो पाया है। नेता जनता की...

  • गाँधी एवं शास्त्री जी का वास्तविक सम्मान उनके स्वप्नों को मूर्त रूप दिये बिना नहीं हो सकता..: सुमित यादव

    माला... आज औपचारिक आइटम बन गयी है। बस 2 अक्टूबर को चढ़ाओ और गाँधी और शास्त्री जी से कह दो की अरे आप टैंसन ना ले कार्य प्रगति पर है।महात्मा गाँधी और शास्त्री जी हर भारतीय के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व है। कोई भी भारतीय, देश के स्वाधीनता आंदोलन मे उनके योगदान को नही भूल सकता। महात्मा गाँधी को गुजरे...

  • हिंसा और उन्माद के बीच महात्मा गाँधी की याद

    जिस समय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव के लिए कार्ल मार्क्स की वैचारिकी से प्रभावित होकर हिंसा और सशस्त्र विद्रोह के साये और सहारे में दुनिया के कई हिस्सों में सत्ता का नया स्वरूप उभर रहा था और साम्राज्यवाद के साथ पूंजीवाद के खेल में विश्व युद्ध की परिस्थितियाँ अपने चरम पर थीं,...

  • " व्यभिचार अब अपराध नहीं।" उसे क्या आशीर्वाद दूँ?

    आज एक बच्चे का जन्मदिवश है। उसे आशीर्वाद देना है। मैं विचार रहा हूँ, उसे क्या आशीर्वाद दूँ? आज ही देश की उच्च न्यायालय ने कहा है,' व्यभिचार अब अपराध नहीं।' अपनी धरा, अपने संस्कार, अपनी परम्पराओं से जुड़ा एक ब्राह्मण ऐसे समय में अपने बच्चों को क्या आशीर्वाद दे? कल यदि उस आठ वर्ष के...

  • चौदह वर्ष के वनवास के दौरान प्रभु श्री राम जी का प्रवास :- (अंजनी मिश्रा)

    प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ। इस वनवास काल में श्रीराम ने कई ऋषि-मुनियों से शिक्षा और विद्या ग्रहण की, तपस्या की और भारत के आदिवासी, वनवासी और तमाम तरह के भारतीय समाज को संगठित कर उन्हें धर्म के मार्ग पर चलाया। संपूर्ण भारत को उन्होंने एक ही विचारधारा के सूत्र में बांधा, लेकिन इस दौरान...

  • समलैंगिकता अप्राकृतिक है, एक ही पैर का चप्पल है.

    विपरीत ध्रुवों में आकर्षण एवं समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण, विज्ञान अपनी किताबों में दर्ज करके बैठा है.. वैसे आपने विज्ञान के इस सिद्धांत की पुष्टि चुम्बक पर अवश्य किया होगा। वैसे मैं विपरीत की बात तो नहीं करूंगा लेकिन जब आप चुम्बक के समान ध्रुव को आपस में मिलाते हैं तो चुम्बको में कुछ विचित्र...

  • धारा 377 को लेकर भय क्यों? इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं। फिर उनसे कैसा खतरा?"

    धारा 377 को लेकर बवाल करने वाले बवालियों की बात मुझे समझ नहीं आ रही। बवालीगण कह रहे हैं कि समलैंगिक सम्बन्ध बहुत बुरे होते हैं। कोर्ट ने इसे मान्यता दे दी तो बहुत बुरा होगा। मैं कहता हूँ, यही एक काम है जिसमें कुछ हो ही नहीं सकता, इसमें अच्छा या बुरा कहाँ से आ गया? दोनों पक्ष कितना भी प्रयास कर लें,...

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