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"लेख" - Page 1

  • गढ़ तो आया, पर सिंह चला गया...

    चौड़ी छाती, शेर की तरह मजबूत भुजाएँ, हवा की तरह लहराती चौड़ी तलवार, आसमान में उड़ता लाल रक्त और नभ में लहराता भगवा... फिल्में जब अपनी मिट्टी के योद्धाओं की अतुल्य वीरता पर बनती हैं तो दर्शक केवल देखता ही नहीं, उस शौर्य को जीता है। तान्हाजी ऐसी ही फ़िल्म है, जिसमें हम मराठों के शौर्य को जीते हैं, 'जय...

  • मकर संक्रान्ति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है?

    प्रेम शंकर मिश्र वर्ष 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को होगी। विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है। 2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।ज्ञातव्य रहे, कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्र...

  • स्वामी विवेकानंद जी की सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक चेतना:- (प्रशान्त द्विवेदी)

    1893 में, 30 साल के विवेकानंद और 54 साल के जमशेदजी टाटा संयोग से एक समुद्री यात्रा पर मिलते हैं। आपसी बातचीत से पता चलता है कि विवेकानंद जी 'वर्ल्ड रिलीजन कॉन्फ्रेंस' जा रहे थे और जमशेदजी भारत में स्टील इंडस्ट्री के टेक्नोल़ॉजी ट्रांसफर के लिए विदेश यात्रा पर थे।विवेकानंद जी टाटा से कहते हैं कि...

  • परत .....

    मतलब तो आप समझ कर भी नहीं समझते हैं । अरे वही परत जिसे अंग्रेजी में लेयर कहते हैं। आजकल सबको चढ़ गया है। किसी को विकास का , किसी को अति प्रगतिशीलता का , किसी को विश्व बंधुत्व का , किसी को निरपेक्षता का, अरे वही जिसमें अपना बुरा और दूसरे का अच्छा लगने लगता है वही धर्म निरपेक्षता का, परत दर परत इतना...

  • 'परत' में गाँव है..मेरे गाँव की तरह....

    करीब बारह साल हुए..मैं बीए द्वितीय वर्ष में था..सत्रह अठारह साल की उम्र बड़ी जोरदार होती है..रचनात्मकता और कलात्मक सृजन का बोध अपने शीर्ष पर होता है। मेरे पास भी एक कवि हृदय था..एक डायरी थी, जिसपर मैं कविताएँ लिखा करता था। कविताएँ लिख तो लेता था, लेक़िन उन कविताओं को समझने वाले और सराहने वालो का इतना...

  • लव जिहाद: इसे प्रेम नही पटाना कहते हैं!

    कहाँ से लिखना प्रारंभ करूँ समझ में नही आ रहा है! कई बार मन भीतर भावों का समंदर हिलोरें मार रहा होता है और लेखनी मन भीतर उठ रहे भावों कर ज्वार भाटे में इस तरह उलझी होती है कि भाव कागज पर उतारने से मना कर देती है। सर्वेश तिवारी श्रीमुख जी की किताब #परत' भी भावनाओं का ज्वारभाटा या कह लीजिए सुनामी...

  • हिन्दू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर : प्रेम शंकर मिश्र

    बच्चों के प्रारम्भिक बोध के लिये ..............पञ्चाङ्ग के महीनों के आगे कोष्ठ में गैगेरियन कैलेंडर 2020-21 की डेट अंकित कर दी है - जिससे समझने में आसानी हो,प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष बोल कर 15-15 दिन होते हैं, जब रात अंधेरी तो कृष्ण पक्ष, और जब उजली तो शुक्ल पक्ष, पहले दिन को एकम या प...

  • 'सर्वेश' नाम का बांका छोरा ....

    पचास के दशक में 'अज्ञेय' की कविता आयी -साँप !तुम सभ्य तो हुए नहींनगर में बसनाभी तुम्हें नहीं आया।एक बात पूछूँ-तब कैसे सीखा डँसना-विष कहाँ पाया?क्या पता किसी जहरीले साँप से संभवतः अज्ञेय की मुलाकात उन दिनों हुई होगी ! फिर मुलाकात भेंटवार्ता में तब्दील हो गई हो ! जो भी हो, कविता विवरण नहीं, कविता का...

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