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कब मनाई जाएगी दीवाली? धनतेरस और नरक चतुर्दशी जानें शुभ तिथि और लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

कब मनाई जाएगी दीवाली? धनतेरस और नरक चतुर्दशी जानें शुभ तिथि और लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
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पंडित चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री ज्योतिष विशारद कानपुर

हिन्दू धर्म में दीपावली का त्योहार बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक अमावस्या तिथि पर भगवान श्री राम 14 वर्षों का वनवास काटकर और लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या लौटे थे। जिसकी खुशी में सारे अयोध्यावासी इस दिन पूरे नगर को अपने राजा प्रभु राम के स्वागत में दीप जलाकर उत्सव मनाया था। इसी कारण से तब से ये परंपरा चली आ रही है। दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व भी होता है। इस दिन शाम और रात के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा की जाती है। धनतेरस दिवाली का पहला दिन माना जाता है। इसके बाद नरक चतुर्दशी फिर दिवाली, गोवर्धन पूजा और आखिरी में भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है। आइए जानते हैं पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली महापर्व की प्रमुख तिथियां और शुभ मुहूर्त..

धनतेरस 2021

हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस का त्योहार हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं पांच दिवसीय दीपावली का पहला दिन होता है। धनतेरस के दिन से दिवाली का त्योहार प्रारंभ हो जाता है। मान्यता है इस तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रगट हो हुए थे। इसी कारण से हर वर्ष धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है। कहा जाता है जो भी व्यक्ति धनतेरस के दिन सोने-चांदी, बर्तन, जमीन-जायजाद की शुभ खरीदारी करता है उसे लाभ होता है, इस बार 02 नवंबर,मंगलवार को धनतेरस का त्योहार हैं।

धनतेरस 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त

धनतेरस 2021- 02 नवंबर, मंगलवार

ज्योतिषाचार्य रमेश चिंतक जी के अनुसार =धनतेरस मुहूर्त - शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर रात के 08 बजकर 11 मिनट तक

धनतेरस पर शुभ खरीकिदारी की अवधि :1 घंटे 52 मिनट तक

प्रदोष काल :17:35 मिनट से 20:11 मिनट तक

वृषभ काल :18:18 मिनट से 20:14: मिनट तक

इस वर्ष नरक चतुर्दशी का त्योहार ज्योतिषाचार्य कमलेश गुप्ता जी के अनुसार03 नवंबर 2021 को मनाया जाता है। यह धनतेरस के बाद मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी को कई और नामों से भी मनाया जाता है जैसे- नरक चौदस, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी आदि। दिवाली से पहले मनाए जाने के कारण इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा होती है। घर के कोनों में दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना की जाती है।

तेल मालिश का समय (अभ्यंग) :सुबह 06:06:05 से 06:34:57 तक

महापर्व दिवाली और महालक्ष्मी पूजा 2021

04 नवंबर 2021 को पूरे देश और विदेश में दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। दिवाली को प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल होने पर दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन करने का विधान है। दिवाली पर घरों को रोशनी से सजाया जाता है। दिवाली की शाम को शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूजा-आराधना होती है। मान्यता है दिवाली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं विधि विधान से माता लक्ष्मी का पूजन करने से घर मे सुख शांति यश की प्राप्ति और धन की वृद्धि होती है और माता लक्ष्मी अपनी कृपा बरसाती हैं। दिवाली पर लोग सुख-समृ्द्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करते है

दिवाली और लक्ष्मी पूजा तिथि- गुरुवार, 04 नवंबर 2021

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : 18:10:28 से 20:06:18 तक

अवधि : 1 घंटे 55 मिनट

प्रदोष काल :17:34:09 से 20:10:27 तक

वृषभ काल : 18:10:28 से 20:06:18 तक

दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : 23:38:52 से 24:30:58 तक

महानिशीथ काल : 23:38:52 से 24:30:58 तक

सिंह काल : 24:42:01 से 26:59:43 तक

दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातःकाल मुहूर्त्त (शुभ) :06:34:58 से 07:57:21 तक

प्रातःकाल मुहूर्त्त (चल, लाभ, अमृत): 10:42:09 से 14:49:21 तक

सायंकाल मुहूर्त्त (शुभ, अमृत, चल): 16:11:45 से 20:49:32 तक

रात्रि मुहूर्त्त (लाभ): 24:04:55 से 25:42:37 तक

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